वैश्विक AI संकट एवं शिक्षा जगत: शिक्षक शिक्षा और मानव क्षमता पर इसके खतरों का एक आलोचनात्मक अध्ययन

Authors

  • डॉ. चंद्र प्रकाश सिंह सहायक आचार्य, शिक्षक शिक्षा विभाग, बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कुशीनगर Author

DOI:

https://doi.org/10.67715/ijerast.v1i2.10

Keywords:

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वैश्विक एआई संकट, शिक्षक शिक्षा, मानव क्षमता, संज्ञानात्मक विकास, डिजिटल विभाजन, मानव-केंद्रित शिक्षाशास्त्र।

Abstract

इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जनरेटिव AI (Generative AI) के अभूतपूर्व प्रसार ने संपूर्ण वैश्विक सामाजिक-आर्थिक और शैक्षणिक परिदृश्य को नया आकार दिया है (Russell & Norvig, 2020)। शिक्षा जगत में AI की पैठ ने जहाँ एक ओर व्यक्तिगत शिक्षण (Personalized Learning) और प्रशासनिक सुगमता के द्वार खोले हैं, वहीं दूसरी ओर इसने एक गंभीर बौद्धिक, नैतिक और संस्थागत संकट को जन्म दिया है (Selwyn, 2019)। यह शोध पत्र शिक्षक शिक्षा (Teacher Education) और मानव क्षमता (Human Potential) पर एआई संकट के बहुआयामी प्रभावों का आलोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष यह दर्शाते हैं कि स्वचालित शिक्षण प्रणालियों पर अति-निर्भरता से अध्यापन कला (Pedagogy) का तीव्र गति से यांत्रिकीकरण हो रहा है, जिससे शिक्षक की संवेदनात्मक एवं नैतिक भूमिका संकुचित हो रही है (Biesta, 2015)। इसके अतिरिक्त, एआई-जनरेटेड प्रणालियों पर शिक्षार्थियों की अत्यधिक निर्भरता उनके संज्ञानात्मक विकास, मौलिक चिंतन (Original Thinking), और समस्या-समाधान कौशल को गंभीर रूप से क्षीण कर रही है (Cotton et al., 2023)। प्रस्तुत अध्ययन में यह प्रतिपादित किया गया है कि एआई संकट से निपटने के लिए मानव-केंद्रित शैक्षणिक नीतियाँ, डिजिटल एथिक्स और अनुभवात्मक मूल्यांकन पद्धतियों को अपनाना अनिवार्य है।

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Published

2026-05-30

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How to Cite

वैश्विक AI संकट एवं शिक्षा जगत: शिक्षक शिक्षा और मानव क्षमता पर इसके खतरों का एक आलोचनात्मक अध्ययन. (2026). International Journal of Emerging Research in Arts, Science and Technology, 1(2), 27-31. https://doi.org/10.67715/ijerast.v1i2.10