शिक्षा में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) का समावेशन: भारत सरकार की पहलों का समालोचनात्मक अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.67715/ijerast.v1i3.12Keywords:
सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT), डिजिटल शिक्षा, समावेशी शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, DIKSHA, SWAYAM, PM eVIDYA, डिजिटल इंडिया, ई-पाठशाला, NDEAAbstract
वर्तमान ज्ञान-आधारित समाज में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (Information and Communication Technology: ICT) शिक्षा की गुणवत्ता, समानता तथा पहुँच को सुनिश्चित करने का एक प्रभावी माध्यम बन चुकी है। वैश्वीकरण, डिजिटलीकरण तथा ज्ञान अर्थव्यवस्था के विस्तार ने शिक्षा व्यवस्था को पारम्परिक शिक्षण पद्धतियों से आगे बढ़ाकर तकनीक-संचालित अधिगम की दिशा में अग्रसर किया है। भारत जैसे विशाल एवं विविधतापूर्ण देश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की सार्वभौमिक उपलब्धता सदैव एक चुनौती रही है। भौगोलिक विषमताएँ, सामाजिक-आर्थिक असमानताएँ, प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी, संसाधनों का असमान वितरण तथा डिजिटल अवसंरचना की सीमाएँ शिक्षा के सार्वभौमिक लक्ष्य में प्रमुख बाधाएँ रही हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारत सरकार ने पिछले दो दशकों में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के समावेशन को राष्ट्रीय शिक्षा नीति का महत्वपूर्ण आधार बनाया है।
यह शोध आलेख भारत सरकार द्वारा संचालित प्रमुख आईसीटी आधारित शैक्षिक पहलों—जैसे डिजिटल इंडिया, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, दीक्षा (DIKSHA), स्वयं (SWAYAM), स्वयं प्रभा (SWAYAM Prabha), ई-पाठशाला, राष्ट्रीय डिजिटल पुस्तकालय (NDLI), पीएम ई-विद्या, राष्ट्रीय डिजिटल शिक्षा वास्तुकला (NDEAR), समग्र शिक्षा के अंतर्गत ICT योजना तथा वर्चुअल लैब्स—का समालोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन में इन पहलों के उद्देश्यों, कार्यान्वयन रणनीतियों, उपलब्धियों तथा व्यावहारिक सीमाओं का विश्लेषण किया गया है।
यह शोध गुणात्मक (Qualitative) एवं दस्तावेज़ीय (Documentary) अनुसंधान पद्धति पर आधारित है। अध्ययन हेतु सरकारी नीतिगत दस्तावेज़ों, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्टों, यूजीसी, एआईसीटीई, एनसीईआरटी, आईआईटी तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों (UNESCO, OECD, UNICEF, World Bank) की रिपोर्टों एवं शोध-पत्रों का विश्लेषण किया गया है।
अध्ययन से स्पष्ट होता है कि भारत सरकार की ICT आधारित पहलों ने शिक्षा की पहुँच, डिजिटल सामग्री की उपलब्धता, शिक्षक प्रशिक्षण, ऑनलाइन अधिगम, बहुभाषिक संसाधनों तथा समावेशी शिक्षा को उल्लेखनीय गति प्रदान की है। कोविड-19 महामारी के दौरान इन पहलों ने शिक्षा की निरंतरता बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तथापि डिजिटल विभाजन, इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या, उपकरणों की अनुपलब्धता, शिक्षकों की डिजिटल दक्षता में असमानता, साइबर सुरक्षा तथा डिजिटल नैतिकता जैसी चुनौतियाँ अभी भी व्यापक रूप से विद्यमान हैं।
अध्ययन निष्कर्षतः यह प्रतिपादित करता है कि ICT केवल तकनीकी संसाधनों का समावेशन नहीं है, बल्कि यह शिक्षा के लोकतंत्रीकरण, गुणवत्ता संवर्धन, नवाचार, समावेशन तथा सतत् विकास का आधार है। भारत सरकार की वर्तमान पहलों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल अवसंरचना का सार्वभौमिक विस्तार, सतत शिक्षक प्रशिक्षण, स्थानीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण ई-सामग्री, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित वैयक्तिकृत अधिगम तथा साइबर सुरक्षा ढाँचे को सुदृढ़ करना आवश्यक है।
